हबीबगंज के बाद अब शिवराज सरकार ने इस रेलवे स्टेशन का नाम बदलने का किया एलान
भोपाल। मध्य प्रदेश के सीएम शिवराज सिंह चौहान ने सोमवार को कहा कि इंदौर में पातालपानी रेलवे स्टेशन का नाम बदलकर तात्या मामा रेलवे स्टेशन किया जाएगा। मध्य प्रदेश मुख्यमंत्री कार्यालय के मुताबिक, मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि इंदौर में 53 करोड़ की लागत से बन रहे बस स्टैंड और पातालपानी रेलवे स्टेशन का नाम तात्या मामा के नाम पर रखा जाएगा। गौरतलब है कि इससे पहले भोपाल के हबीबगंज रेलवे स्टेशन का नाम बदलकर कमलापति स्टेशन कर दिया गया है। मध्य प्रदेश सरकार ने स्टेशन का नाम बदलकर महान गोंड रानी कमलापति के नाम पर करने का प्रस्ताव केंद्रीय गृह मंत्रालय को भेजा, मंत्रालय ने मंजूरी देते हुए रेलवे बोर्ड को बदलाव के लिए पत्र लिख दिया और बोर्ड ने हबीबगंज स्टेशन का नाम रानी कमलापति करने की अधिसूचना जारी कर दी। अगले एक घंटे में स्टेशन पर हबीबगंज के बोर्ड हटाए जाने शुरू हो गए और रानी कमलापति के बोर्ड लगना शुरू हो गए। अब 15 नवंबर को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी विश्व स्तरीय सुविधाओं वाले इस रानी कमलापति रेलवे स्टेशन का लोकार्पण किया। इसलिए नाम पड़ा था हबीबगंज: हबीबगंज स्टेशन ब्रिटिश काल में बना था। वर्ष 1979 में जब इस स्टेशन का विस्तार हुआ तो नवाब खानदान के हबीबउल्ला ने अपनी जमीन दान में दी थी। उनके नाम पर ही स्टेशन का नाम हबीबगंज रखा गया था। हबीबउल्ला भोपाल के नवाब हमीदउल्ला के भतीजे थे। आक्रमणकारियों का मुकाबला किया था रानी कमलापति ने: इतिहासकार डा. आलोक गुप्ता के अनुसार 18वीं सदी में चौतीसा गिन्नौरगढ़ रियासत के गोंड राजा निजाम शाह थे। भोपाल क्षेत्र इसी का हिस्सा था और इसका नाम भोजपाल था। भोजपाल के नजदीक सीहोर के सलकनपुर के राजा कृपालसिंह सरोतिया की बेटी थीं कमलापति। उन्हें घुड़सवारी, तलवारबाजी और तीरंदाजी का शौक था। वह राजा कृपालसिंह की सेना की सेनापति भी रहीं। सलकनपुर राज्य के अंतर्गत आने वाले बाड़ी किले के जमींदार का लड़का था चैनसिंह। चैनसिंह राजकुमारी कमलापति से विवाह की इच्छा रखता था। राजकुमारी कमलापति ने उससे विवाह करने से मना कर दिया था। बाद में रानी कमलापति का विवाह गोंड राजा निजाम शाह से हुआ। कुछ वर्ष बाद चैनसिंह ने धोखे से निजाम शाह की हत्या कर दी थी। इसके बाद रानी कमलापति अपने बेटे नवल शाह के साथ भोजपाल आ गई और यहीं से राजकाज संभालने लगीं। चैनसिंह से बदला लेने के लिए रानी ने अफगान लुटेरे दोस्त मोहम्मद खान की मदद ली। बाद में खान की नीयत बदल गई। वह रानी कमलापति के राज्य पर ही हमले करने लगा। रानी ने उससे कड़ा मुकाबला किया। उनकी सेना का अंतिम युद्ध भी दोस्त मोहम्मद खान के लोगों से ही हुआ। रानी का 16 वर्षीय बेटा नवल शाह इसमें शहीद हो गया। इसके बाद रानी ने भोजपाल के छोटे तालाब में जल-समाधि ले ली थी।