संयुक्त किसान मोर्चा का ऐलान-जारी रहेगा किसान आंदोलन


पीएम को पत्र लिखकर एमएसपी गारंटी बिल के लिए कमेटी की मांग करेंगे; कल लखनऊ में महापंचायत

लुधियाना।  संयुक्त किसान मोर्चा का आंदोलन फिलहाल जारी रहेगा। रविवार को यह फैसला एसकेएम की बैठक में लिया गया। भारतीय किसान यूनियन राजेवाल के अध्यक्ष बलवीर सिंह राजेवाल और जतिंदर सिंह विर्क ने बताया- 22 नवंबर को लखनऊ में महापंचायत बुलाई गई है। 26 नवंबर को काफी किसान आ रहे हैं। 27 को आंदोलन के अगले कदम के बारे में विचार किया जाएगा। राजेवाल ने कहा - प्रधानमंत्री के ऐलान के बाद अब तक सरकार ने बातचीत की अपील नहीं की है। प्रधानमंत्री का ऐलान अभी स्वागत के लायक नहीं है, क्योंकि अभी कानून रद्द करने का सिर्फ ऐलान हुआ है। जब तक एमएसपी गारंटी बिल नहीं लाया जाता और दूसरी मांगें नहीं मानी जातीं, तब तक स्वागत नहीं किया जाएगा। केंद्रीय कैबिनेट 24 नवंबर को तीनों कृषि कानूनों को वापस लेने की मंजूरी पर विचार करेगी। सूत्रों ने बताया कि इसके बाद कानूनों को वापस लेने वाले बिल संसद के शीतकालीन सत्र में पेश किए जाएंगे। संसद का सत्र 29 नवंबर से शुरू होने वाला है।


२९ नवंबर को होगा संसद तक ट्रैक्टर मार्च

बैठक के बाद राजेवाल ने कहा कि हमने मीटिंग में तय किया है कि जो कार्यक्रम संयुक्त किसान मोर्चा ने पहले तय किए थे वे आगे भी जारी रहेंगे. 27 तारीख को फिर से संयुक्त किसान मोर्चा की मीटिंग होगी. जो मांगे बाकी रह गई है उसके बारे में प्रधानमंत्री को पत्र लिखा जाएगा. उन्होंने कहा कि 29 नवंबर को संसद तक ट्रैक्टर मार्च होगा. वहीं पराली कानून,  बिजली बिल, एमएसपी क़ानून को लेकर सरकार को खुली चि_ी लिखेंगे.बता दें कि कृषि सुधार कानून वापस लिए जाने की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की घोषणा के बावजूद किसान संगठन प्रदर्शन जारी रखेंगे. संयुक्त किसान मोर्चा ने रविवार को बैठक कर निर्णय लिया कि आंदोलन के लिए पूर्व में जो कार्यक्रम निर्धारित किए गए थे, वे जारी रहेंगे. 22 नवंबर को लखनऊ में महापंचायत, 26 नवंबर को आंदोलन के एक साल पूरे होने पर सभी मोर्चों पर भीड़ बढ़ाई जाएगी और संसद का शीतकालीन सत्र शुरू होने पर 29 नवंबर को संसद कूच किया जाएगा.बता दें कि सिंघु बॉर्डर पर संयुक्त किसान मोर्चे की बैठक से पहले योगेंद्र यादव ने आज मीडिया के साथ बातचीत की थी. इसमें उन्होंने बताया था कि एसकेएम की बैठक से पहले हरियाणा स्कीम की एक बैठक हुई है. कृषि कानूनों की वापसी की घोषणा का स्वागत है, लेकिन रूस्क्क और किसानों के खिलाफ दर्ज केस पर कोई बात नहीं की गई है. योगेंद्र यादव ने कहा कि एसकेएम की बैठक में इन सभी मुद्दों पर भी चर्चा होगी.