मृत किसानों को मिले शहीद का दर्जा और एमएसपी गारंटी कानून बने: टिकैत
लखनऊ में आयोजित हुयी किसान मोर्चा की महापंचायत नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तीनों कृषि कानून वापस लेने का ऐलान भले ही कर चुके हों, लेकिन संयुक्त किसान मोर्चा आंदोलन को आगे बढ़ाने की रणनीति तैयार कर रहा है। इसी के तहत, सोमवार को राजधानी लखनऊ में इको गार्डेन पार्क पर किसान मोर्चा की महापंचायत में भाकियू नेता राकेश टिकैत पहुंचे। उन्होंने कहा कि एमएसपी कानून बने और आंदोलन में मृत किसानों का शहीद का दर्जा मिले। इस दौरान उन्होंने किसान आंदोलन के दौरान मरने वाले 750 किसानों को शहीद का दर्जा दिए जाने की मांग की। राजधानी पहुंचे किसान नेता राकेश टिकैत ने केंद्रीय गृह राज्य मंत्री अजय मिश्रा टेनी को बर्खास्त करने की भी मांग की है। टिकैत ने कहा, हम न्यूनतम समर्थन मूल्य को सभी फसलों और सभी किसानों के लिए कानूनी अधिकार के रूप में सी2 प्लस 50 प्रतिशत (उत्पादन लागत से 50 प्रतिशत अधिक) के फामूर्ले पर आधारित बनाना चाहते हैं। हमारे पत्र में हमने प्रधानमंत्री को याद दिलाया है कि उनकी अध्यक्षता में एक समिति ने 2011 में तत्कालीन प्रधानमंत्री से इसकी सिफारिश की थी और उनकी सरकार ने बाद में संसद में भी इसकी घोषणा की थी।उन्होंने कहा कि एमएसपी पर कानून बनना चाहिए। उन्होंने कहा की दूध के लिए भी एक नीति आ रही है उसके भी हम खिलाफ हैं, बीज कानून भी है। इन सब पर बातचीत करना चाहते हैं। महा पंचायत में बड़ी संख्या में किसान लखीमपुर खीरी से आए थे और 3 अक्टूबर की घटना का मुद्दा, जिसमें केंद्रीय मंत्री अजय मिश्रा टेनी के बेटे आशीष मिश्रा की एक एसयूवी द्वारा कथित तौर पर चार किसानों को कुचल दिया गया था, महा पंचायत में प्रमुखता से उठा।राकेश टिकैत ने असदुद्दीन ओवैसी के उस बयान पर भी निशाना साधा, जिसमें उन्होंने कहा था कि सीएए कानून वापसी हो वरना यूपी को शाहीन बाग बना देंगे। टिकैत ने कहा कि ओवैसी और भाजपा के बीच चाचा-भतीजा वाली बॉन्डिग है। उन्हें इस बारे में टीवी पर बात नहीं करनी चाहिए, वे सीधे पूछ सकते हैं।मोर्चा से जुड़े नेताओं की दलील है कि शीत कालीन सत्र में बिल रद्द होने का वह लोग इंतजार करेंगे। लखनऊ की महापंचायत के साथ मोर्चा के लोग सरकार पर इसको लेकर और ज्यादा दबाव बनाने की तैयारी कर रहे हैं।संयुक्त किसान मोर्चा अब फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर कानून बनाने पर अड़ा है। मोर्चे की ओर से कहा जा रहा है कि केंद्र सरकार लगातार इस मुद्दे पर किसानों को गुमराह कर रही है कि एमएसपी लागू थी, लागू है और लागू रहेगी। जबकि हकीकत यह है कि किसानों की उपज औने-पौने दामों पर खरीदी जा रही है। संसद से कृषि बिल पास होने व कानून बनने के बाद से किसानों का आंदोलन चल रहा है।